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Poetry

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Jun'22

लिफाफा देखते हो

लिफाफा देखते हो खत का मजमू्‌ भापने की तमीज्‌ ऐक दिन में ही नहीं आती, वर्षो खत वाँचने पड़ते हैं।आदमी …

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Jun'22

बड़ा रोमाञ्चका री होता है

बड़ा रोमाञ्चका री होता है अनायास किसी नन्‍हीं-सी झील में फ़िसल जाना उसकी गहराइयों में डूबना-उतराना, किनारे पर आना और …

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Jun'22

नींव के पत्थर,

हम,महल की नींव के पत्थर, अगर पूजे नहीं जाते शिखर की भाँति तो क्‍या फके पड़ता है। सभी दीवाल, छत, …

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Jun'22

बढ़-बढ़ कर मत बोलो,

बढ़-बढ़ कर मत बोलो, बादल वढ़ बढ़ कर मत बोलो । पहले खुद को तोलो बादल – पहले खुद को …

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Jun'22

राहों का पत्थर

अब तक जो राहों का पत्थर कह जाते थे कल वे ही मेरा वन्दत करने आएंगे । आज अगर मैं …

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Jun'22

अपना शहर।

ज्ाज फिर पवैत्रंह्तं हैं अपना शहर। फिर ते हांगां ग्रन्‍्त हैं अपनी गहरे । 7 मे माँ रहेंगाति कीई भी …

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Jun'22

रहते हैं नीम .के तले।

. रहते हैं नीम .के तले। हम जैसे दूध के जले ॥ : अपना था दोषः बस यही , खाया …

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Jun'22

नोचे तपतो रेंत

नोचे तपतो रेंत और ऊपर सूरज की आग। जलती हुई हवाए डेसती जेसे काले नाग ॥ हुई हवाए ऐसे में …

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Jun'22

कमल सरीखी सूरत

कमल सरीखी सूरत बातें चुभती नागफनती। मुझको रही शिकायत दुनियाँ तुझसे बस इतनी ॥ केले को संगत बेरों की पीपल …

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Jun'22

एक शब्द भर हुआ

एक शब्द भर हुआ कि लहरें दौड़ गईंतट की काई तक | लेकिन मैं बेखबर दूबता गया सिरधुं कींगहराई तक …

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