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All posts by Deepankaj

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Jun'22

पानी पर काठ सा तैरता भविष्य ।

पानी पर काठ सा तैरता भविष्य । और भूत छूट गया तट-सा अदृश्य ॥ वर्तमान, तल जेसा गहरा अथाह , …

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Jun'22

धूंल भरे मेले दरपन।

यहाँ – वहाँ धूंल भरे मेले दरपन। खोज रहे इनमें से हम अपनापन ॥ नियमहीन संधियाँ, अनर्गल समास । अर्थहीन …

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Jun'22

यहाँ – वहाँ धूंल भरे मेले दरपन।

यहाँ – वहाँ धूंल भरे मेले दरपन। खोज रहे इनमें से हम अपनापन ॥ नियमहीन संधियाँ, अनर्गल समास । अर्थहीन …

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Jun'22

लोगों ने पहले तो बुने स्वयं जाले।

लोगों ने पहले तो बुने स्वयं जाले। लेकिन फिर चूहों की तरह कृतर ढाले। भर-भर कर बेठे हैं मक्खन पपरीौटे …

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Jun'22

मन के भीतर मन ॥

मन के भीतर मन ॥। ये कैसा दुहरापन। अपनी ही चाहत से जझ रही आस्थाए , नास्तिक मतबादों से ज्यों …

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Jun'22

आज की शाम ॥

आज की शाम ॥ मित्रों के नाम । चीखती . बहस सहज ॒चुप्पियाँ , कड़वी कॉफी और चुस्कियाँ , मित्रों …

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Jun'22

एक बार दुहरा लेता हूँ।

मेरा कवि मर जाय न मुझको जब यह आशंका होती है तब अनगाए गीतों को मैं एक बार दुहरा लेता …

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Jun'22

जोड़ लिए मैंने वे टुडे मस्धुल ।

जोड़ लिए मैंने वे टुडे मस्धुल । आओ उस. पाए चलें ॥ फटे हुए पाल सिए’,, खोजी पतवार, चलों चलें …

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Jun'22

प्रातः काल किरन

प्रातः काल किरन के पाँखी साँकल खोल गये । अलसाये आँगन में पीली केशर घोल गये ।। ठण्ठी हवा कहारिन …

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Jun'22

शरद के दिन-रात |

भाये हैं फिर वही शरद के दिन-रात | ओस न्हायी दूब, दूध शोये प्रात ॥ कुनकुनी किरणें, सुहाती धूप पीली …

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