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सुख कैसे प्राप्त हो ? भाग – 3

लोगो का ये अज्ञान कि हम जो कर रहे हैं बस यही कर्म है, इसको सुधारिए, भगवान् का नाम ले लेंगे, भगवान् के आगे फूल चढ़ा देंगे, कर्म सुधर गया हमारा, कर्म नहीं सुधरा है ! आप गलतफहमी में हैं | ये अज्ञान दुःख का कारण होता है | जो चीज सही करने की है उसको तो हम जानते ही नहीं है और जो चीज बेकार की है उसमें सारी ताकत लगाए दे रहे हैं | इस शरीर को शुद्ध करने के लिए पूरी शक्ति लगाए दे रहे हैं और भीतर जो बैठा है चेतन, भीतर जो बैठा है living, उसके लिए क्या कर रहे हैं, उसको कोई भोजन दे रहे हैं | इस शरीर को तो खूब खाना खिला रहे हैं बढ़िया बढ़िया ला ला कर के | इसके लिए बढ़िया बढ़िया शैम्पू लगा रहा हैं, उसके लिए कोई शैम्पू है ? वहां जो वायरस घुसते जा रहे हैं, उसको साफ़ करने के लिए कुछ है हमारे पास ? कोई वायरस रिमूवल है हमारे पास ? कोई साबुन है ? उसके भीतर जो कमजोरी आती चली जा रही है उस कमजोरी को दूर करने के लिए कुछ फ़ूड है हमारे पास ?

ये ज्ञान ही नहीं है हमको ! (एक श्रोता)

उसके बारे में सोच ही नहीं रहे हैं | उसका खाना केवल knowledge है | उससे वो मजबूत होता है | उसमें जो वायरस remove करने वाला वायरस remover है वो भी knowledge ही है | हम उसकी तरफ से बेखबर हैं | हम सोचते हैं उसकी जरूरत क्या है ? हमने तो इंजीनियरिंग किया है, हम पैसा कमा लेंगे |

तो ज्ञान जो देते हैं आजकल ….(एक श्रोता)

विद्या है, ज्ञान नहीं है |

हां, वो विद्या जो देते हैं वो आठ घंटा नौकरी करने के बाद कमाने के वास्ते दिया जाता है लेकिन जो 16 घंटे हैं, उसके लिए हमको कुछ नहीं पढाया जाता है | (वही श्रोता)

कुछ नहीं है, वही तो मैं कह रहा हूँ | उसके लिए थोडा सा टाइम निकालना चाहिए | ज्ञान प्राप्त करना चाहिए | ज्ञान से सुख मिलेगा, अज्ञान से हमेशा दुःख मिलेगा | जो चीज हम समझ रहे हैं जैसी, वो वैसी है ही नहीं | मेरी बात को समझ रहे हैं कि नहीं समझ रहे हैं | हम समझ रहे हैं कि ये होगा और वो हो नहीं रहा है और अब हम दुखी हो रहे हैं |

क्योंकि वो 8 घंटा कमाने के वास्ते पूरा जिंदगी तैयारी करते हैं, पढ़ाई लिखाई करना है, नौकरी करना है, मतलब पूरा प्लानिंग करते हैं | (वही श्रोता)

मतलब करियर बनाते हैं, सीधे मुद्दे की बात पर आओ | Career की spelling बदल दो, तो हम carrier पर रख कर जिंदगी को ढो रहे हैं |

हहहाहा…….(ठहाकों की आवाज )

सारी जिंदगी करियर बनाने में लगा दो और फिर उसके बाद ढोते हैं जिंदगी को | जिंदगी जीना तो जानते ही नहीं | आप जिंदगी जियेंगे तो सुखी होंगे |

सही है | (वही श्रोता)

जिंदगी जियेंगे ही नहीं तो सुखी कहाँ से होंगे ? जिंदगी को जियेंगे कब ? जब जिंदगी को पहचानते होंगे ! जिंदगी को भी तो नहीं पहचानते, अपने को भी नहीं पहचानते | सुख भीतर बैठा हुआ है, उसको भी नहीं पहचानते और सुख क्या है ? ये भी नहीं पहचानते | समझ  रहे हैं, इस चीज में सुख है, इस चीज में सुख है, इस चीज में सुख है जबकि सुख तो हम create कर रहे हैं सोच कर के | grandson हमारी मूंछ खींच रहा होता है, तब हम सोचते हैं, innocent हैं, बच्चा है, अपना है | जब पडोसी खींच रहा होता है तब हम सोचते हैं, सब जानता है, जान बूझ कर खींच रहा है, मूंछ खींचने का मतलब नहीं जानता ये ? ये हमको hurt करना चाहता है, पराया है, इसका कोई हक़ नहीं है मूंछ खींचने का | ये दो तरह के अलग अलग विचार (thinking), दो तरह के अलग अलग भाव (feeling) create करती है | जब उसको innocent समझते हैं तो प्यार की भावना आती है, जब जान बूझ करके खींचा हुआ समझते हैं तब दुःख की भावना आती है | जबकि उसमें सुख की फीलिंग होती है | सुख की भावना से प्यार उत्पन्न होता है, दुःख की भावना से क्रोध उत्पन्न होता है | emotions पैदा होते हैं | ये आदमी की जन्म से properties नहीं हैं, ये create होते हैं | मेरी बात समझ रहे हैं, नहीं समझ रहे हैं |

तो दुःख का कारण है, अज्ञान | अगर हम पडोसी के मूंछ खींचने पर ये सोच लें, मूर्ख है | तब क्रोध नहीं आएगा और बच्चे के मूंछ खींचने पर ये समझ लें कि जान बूझ कर खींच रहा है फिर गुस्सा आ जायेगा | क्योंकि ये भाव सोचने से (thought) से पैदा होते हैं | वास्तव में कहीं है नहीं, ये हमारे कर्मो के फल है |

एक कहानी सुनाना चाहता हूँ | आप मेरी बात को समझ रहे हैं न (प्रश्नकर्ता की ओर इशारा करके )

हाँ हाँ (वही प्रश्नकर्ता)

गुरु जी, एक question है, ये जो आप कह रहे हैं कि ये जो हमारा non-living है, इसको knowledge चाहिए लेकिन मेरे ख़याल से, knowlege has two types – good knowledge और bed knowledge. (श्रोताओं में से एक महिला का प्रश्न).

Nothing is good, nothing is bed. ये अज्ञान है | ये अच्छा है और ये खराब है, ये अज्ञान है | ये सुख है, ये दुःख है, ये अज्ञान है | मेरी बात समझ रहे हैं या नहीं | अज्ञान क्या है ? ये जो सारा संसार है, इसमें ये समझना कि ये अच्छा है, ये बुरा है, ये सुन्दर है, ये असुंदर है, ये अपना है, ये पराया है, ये सुख है, ये दुःख है, ये सब अज्ञान है | अभी मैं बताऊंगा इस चीज को और डिटेल में, या चलो पहले इसे ही clear कर लेते हैं |

क्या है सुन्दर इस दुनिया में और क्या है असुंदर ? हिंदुस्तान में पत्नी, तोते जैसे नाक वाली सुन्दर समझी जाती है | चीन में चपटी और मोटी नाक सुन्दर समझी जाती है | बताओ कहाँ है सुन्दरता ? हिंदुस्तान में पतले पतले, लाल लाल होठ, बिम्बा फल जैसे सुन्दर समझे जाते हैं, अफ्रीका में मोटे मोटे लटके हुए होठ सुन्दर समझे जाते हैं | कहाँ है सुन्दरता ? एक दिन एक फिल्म आ रही थी – मुग़ल-ए-आजम | आप सब लोगों ने देखि होगी शायद, बड़ी प्रसिद्द फिल्म है | पहले वो black & white थी अब वो eastman कलर हो गयी है | तो टीवी पर वो फिल्म आ रही थी, मेरे चारो बच्चे देख रहे थे, मेरी पत्नी भी देख रही थी | मुझे भी बुला लिया कि देखो कलर में आ रही, देखो कैसे लगती है | मैं भी बैठ गया | मेरा पूरा परिवार बैठ कर देख रहा था, चार बेटे हैं मेरे और दो हम मियां बीवी, छहों बैठ कर देख रहे थे | उसमें एक गाना आता है, पर्दा नहीं जब कोई खुदा से, बन्दों से पर्दा करना क्या | मधुबाला डांस करती है और जैसे ही डांस start हुआ, अपने जमाने की बड़ी hit फिल्म थी और ये गाना बड़ा प्रसिद्द हुआ था | परदे के ऊपर पैसे फिंकते थे | जैसे ही वो गाना start हुआ, मेरी पत्नी बोलती है, मधुबाला से ज्यादा सुन्दर कोई actress नहीं है, उसकी बात पूरी नहीं हुई तब तक मेरा बेटा बोलता है, क्या मम्मी, आप बुढिया को लेकर बैठी हुई हैं मधुबाला, सबसे ज्यादा सुन्दर हेमामालिनी है | उसकी बात पूरी नहीं हुई, तब तक मेरा दूसरा बेटा बोलता है, क्या भाईसाहब ! क्या उस मोटरिया हेमामालिनी की बात कर रहे हैं, सबसे ज्यादा सुन्दर तो श्रीदेवी है | मैंने अपने तीसरे बेटे से पुछा कि तुम बताओ तुम्हारी क्या राय है ? वो बोला, पापाजी अगर मेरी बात पूछो तो माधुरी दीक्षित सबसे ज्यादा सुन्दर है | मकबूल फ़िदा हुसैन जैसे चित्रकार ने उसकी पेंटिंग बनाई है | मैंने चौथे वाले से भी पुछा, कि तेरा क्या ख़याल है ? वो बोला कि सबसे ज्यादा सुन्दर ऐश्वर्या राय है, उसको विश्वसुंदरी का खिताब मिला हुआ है | अब बच्चों ने मुझसे पुछा कि आप बताइए आपको कौन सुन्दर लगता है ? मैंने कहा – चारों की बात सुनने के बाद मुझे लगता है, इस दुनिया में कोई सुन्दर है ही नहीं ! बोले क्या मतलब ? मैंने कहा – अगर एक भी सुन्दर होती तो सबको सुन्दर लगती भाई ! किसी को कोई,किसी को कोई सुन्दर क्यों लग रही है ? इसके माने सुन्दरता कहीं नहीं है ! सुन्दरता तो आपके भीतर है, आप उसको impose कर रहे हैं किसी के ऊपर |

समझ रहे हैं ! ऐसे ही सुख दुःख को हम impose करते हैं, चीजों पर | वास्तव में सुख दुःख कहीं नहीं है | सुन्दरता असुन्दरता भी कहीं नहीं है |

समय समय सुन्दर सबै, रूप कुरूप न कोय,

जाकी जित जेती रूचि, तित तेती रूचि होय |

हिंदी में एक बड़ा गन्दा सा phrase है, दिल लगा गधी से, तो परी क्या चीज है ?

हाहाहा (श्रोताओं की हंसी)

सुना है आप लोगों ने ? कहाँ है सुन्दरता ? बताइये मुझे ! कोई सुन्दर नहीं है, कोई असुंदर नहीं है, कोई अच्छा नहीं है, कोई बुरा नहीं है | शराब पीना बड़ा ख़राब है, अच्छा नहीं है शराब पीना | लेकिन हमारे हाथरस में एक बहुत बड़े कवि हुए हैं, काका हाथरसी | जब साठ पर कर लिया तो उनको ज्यादातर depression रहने लगा | वो डॉक्टर के पास गए, डॉक्टर ने उनको बताया, एक पेग वाइन का रोज रात को पिया करो | बताइए शराब पीना अच्छा है या बुरा है | Poison बड़ी ख़राब चीज है, पर उसी poison से डॉक्टर दवाई बना कर खिला देता है, लोगो की जिंदगियां बचा लेता है तो जहर तो बहुत अच्छी चीज है | क्या ख़राब है ? क्या अच्छा है ? कुछ अच्छा नहीं है, कुछ ख़राब नहीं है (Nothing is Good, Nothing is bad) | कुछ भी सुन्दर नहीं है, कुछ भी असुंदर नहीं है (Nothing is beautiful, nothing is ugly) | कहीं भी सुख नहीं है, कहीं भी दुःख नहीं है (Nothing is pain, nothing is pleasure) | this is the moral. मेरी बात को समझ रहे हैं, नहीं समझ रहे हैं ?

knowledge आपको सुख देगी, जो अज्ञान है वो हमेशा आपको दुःख ही देगा | इसीलिए नानक जी को कहना पड़ा, नानक दुखिया सब संसार ! कोई सुखी मिलता ही नहीं | कोई कोई तो सिर्फ इसलिए दुखी है कि दूसरा सुखी क्यों है ?

मेरा question वही है कि तो फिर knowledge क्या है ? (वही महिला श्रोता)

यही knowledge है, truth is knowledge. हम सत्य से डरते हैं, उसको accept नहीं करना चाहते क्योंकि हमारी feelings hurt होती हैं उससे | दुनिया में हम दो चीजो से डरते हैं, अपने आप से और truth से | जब अपनी तरफ ईमानदारी से देखेंगे तो बड़ी खामियां और गन्दगी निकलेगी, इसलिए हम अपनी तरफ नहीं देखना चाहते | हमेशा दूसरों की तरफ ही देखना चाहते है, वो ये कर रहा है, वो ऐसी शर्ट पहन रहा है, उसके पास इतनी बड़ी कार है, वो ये काम नहीं कर रहा है, वो इस काम को गलत कर रहा है , इन सबको देखते फिर रहे हैं, हम क्या कर रहे हैं, ये नहीं देखते हैं | उसके विचार बड़े खराब हैं, उसके विचार बड़े अच्छे हैं, अरे, अपने विचार देखो भाई ! सबसे ज्यादा डरते हैं अपने आप को देखने से | अपने आप से भाग रहे हैं और सबसे ज्यादा डरते हैं truth से | और ज्ञान तब ही मिलेगा जब अपने को देखोगे और truth को देखोगे | क्योंकि ज्ञान इन्हीं दो जगह है, तीसरी कहीं जगह knowledge नहीं है | मेरी बात को समझ रहे हैं न, अब मैं बात को आगे बढाता हूँ |

तो सुख दुःख क्या है ? कुछ नहीं हैं, हमारे creation हैं | इसका मतलब ये है कि अगर सुख दुःख हमारे creation हैं तो ये हमारी मर्जी है कि सुख प्राप्त करें या दुःख प्राप्त करें | लेकिन हमने गलत आदत (habit) डाल रखी है, दुःख प्राप्त करने की | एक तीसरी चीज और है, सुख दुःख से अलग, उसको भी जान लें | वो है आनंद | जो सुख और दुःख दोनों से अलग, तीसरी चीज है | सुख क्षणिक (temporary) होता है, दुःख भी क्षणिक (temporary) होता है | आनंद permanent होता है | अगर हमें पाना है तो सुख के पीछे नहीं भागना चाहिए | दुःख के पीछे भी नहीं भागना चाहिए | हमको पाना है तो आनंद को प्राप्त करना चहिये |

That is Happiness na ? (किसी श्रोता की आवाज)

happiness तो सुख है | आनंद का अंग्रेजी में कोई शब्द नहीं है क्योंकि ये concept है ही नहीं यहाँ |

self-realization ? (किसी महिला श्रोता की आवाज)

हाँ, एक शब्द काम चलाऊ है – ecstasy.

Bliss will be more correct (किसी श्रोता की आवाज)

वो काफी नजदीक है लेकिन पूरी तरह से meaning नहीं है आनंद का |

आनंद is the state of mind. (किसी श्रोता की आवाज)

आनंद का मतलब है – beyond self. जिसे हमारे यहाँ कहा गया है, अध्यात्म. अधि means beyond. आत्म माने self. beyond self जब हम चले जाते हैं, तब आनंद फील होता है | अभी मैं उदाहरण देकर समझाता हूँ |

आनंद word का origin क्या है ? (एक श्रोता की आवाज)

असली शब्द है – रस | दो शब्द प्रयुक्त (use) हुए हैं हमारे यहाँ | वेदों में और वैदिक संस्कृत में जो शब्द है, वो है रस और जो लौकिक संस्कृत में शब्द है वो है आनंद | आनंद और रस, both are same.  हमारे यहाँ उपनिषदों में एक शब्द मिलता है – रसौवैसः | ये रस है क्या चीज ? ये आनंद है क्या चीज ? वैसः – वो जो ईश्वर है, वो जो ब्रह्म है, वो जो god है, वो आनंद है | वो ईश्वर ही ultimate truth है | मेरी बात समझ रहे हैं न, वो आनंद है | ईश्वर की, ब्रह्म की जितनी परिभाषाएं हैं हमारे यहाँ, सच्चिदानंद, सत् है, चित्त है और आनंद हैं जहाँ | ब्रह्म के बारे में वेद कहता है, आनंदों ब्रह्मणों मूर्ती | ब्रह्म की जो मूर्ती है, उसका स्वरुप वैसा है, कैसा है ? जैसा आनंद का है ! यानि आनंद ही ब्रह्म है | आनंद को पाना है, तो ब्रह्म मिल गया | ईश्वर  मिल गया आपको | आनंद को पा लिया तो सब कुछ मिल गया | वो permanent सुख है, ये सुख temporary सुख है | उस आनंद का एक छोटा भाई और है, ब्रहमानंद सहोदर कहते हैं उसको | हमारे यहाँ, बड़ी बाल की खाल निकाली गयी है | हर चीज के आखिर तक पहुंचा गया है | उसको ब्रह्मानंद सहोदर कहते हैं यानी वो भी आनंद थोड़ी देर का होता है लेकिन है आनंद | दुःख नहीं है |   थोड़ी देर का है, पर है आनंद | काव्य में, poetry में उसको रस कहते हैं | आपने कविता में सुना होगा, कविता में रस होता है | उसको भी रस कहते हैं | उसी आनंद का एक और छोटा भाई है | वो भी रस है, भोजन का रस | भोजन में भी रस होता है | भोजन के षटरस व्यंजन कहलाते हैं, छह रस होते हैं भोजन में | नाम नहीं जानते होंगे आप | छह रस होते हैं भोजन में |  छह रस कौन कौन से होते हैं भोजन में ?

मीठा, नमकीन, कडवा (एक श्रोता की आवाज)

कसैला ?

चरपरा (एक और श्रोता की आवाज)

खट्टा, मीठा, कडवा, कसैला, चरपर और नमकीन | चरपरा माने मिर्च, तीखा | ये छह रस होते हैं | रस, आनंद या ब्रह्म एक ही स्थिति में मिलता है | वो स्थिति है समाधि | समाधि यानी जब हम beyond self चले जाएँ, तब मिलता है | मैं ब्रह्म वाला आनंद तो यहाँ आप लोगो को explain नहीं कर सकता और नहीं उदाहरण दे सकता हूँ क्योंकि वो केवल महसूस किया जा सकता है | गूंगे का गुण है | लेकिन दुसरे आनंद जो उससे मिलते जुलते हैं, उनको explain कर सकता हूँ, उदाहरण देकर के |

सबसे पहले भोजन का आनंद लेते हैं, कोई भी आनंद हो, योग से प्राप्त होता है | योग से ही समाधि लगती है, अष्टांग योग में जो बताया गया है, यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि | योग ख़त्म हो जाता है समाधि पर क्योंकि आनंद मिल जाता है वहां पर | अष्टांग योग जो है, इसकी आठवीं स्टेज समाधि है | वहां आनंद आ जाता है | तो आनंद मिलेगा योग के through | ठीक है ! अब समाधि को हटा देता हूँ, थोड़ी देर के लिए | योग समझाता हूँ | योग मतलब दो चीजों का मिलना | एक बहुत स्वादिष्ट सब्जी बनाइये आप, आलू की | गरम मसाला भी डालें उसमें, नमक भी बढ़िया पड़ा हो, सब चीज अच्छी अच्छी डालें उसमें और उसमें ऊँगली डाल कर बैठ जाइये आप |कोई स्वाद, कोई रस महसूस होगा ? हमारे यहाँ रस की परिभाषा की गयी, भरत मुनि ने की है |

आस्वद्यते ता रसः |

जिसका आस्वादन किया जाए, वो रस है | यानि वो जो आनंद है, वो मह्सूस्र करने की चीज है | आस्वादन माने महसूस करना | अब हम ऊँगली डाल कर बैठे हैं सब्जी में, क्या हमको कोई स्वाद या कोई रस महसूस हो रहा है ? नहीं | कब महसूस होगा, जब योग होगा | मैंने बताया दुनिया में जो कुछ है, उसका एक प्रोग्राम भीतर है | दुनिया की जो चीज उस related भीतर के प्रोग्राम से touch करेगी, तब तो हमें कुछ हासिल होगा, वर्ना नहीं होगा | उसका प्रोग्राम जीभ पर है, जीभ में से भी एक रस निकलता है, लार निकलती है | वो सब्जी जब तक उस से touch नहीं करेगी, कोई स्वाद नहीं आएगा, कोई रस नहीं आएगा और जिसको जीभ में लार नहीं आ रही है, उसको डॉक्टर कहेगा बीमार है | उसको किसी चीज में स्वाद नहीं आएगा | वो कहेगा गोबर जैसा लग रहा है, तुम क्या खिला रहे हो | मिठाई भी गोबर जैसी लगेगी | यानि स्वाद लेने के लिए, रस लेने के लिए दो चीजो का होना जरूरी है | बाहर रस होना चाहिए और भीतर भी रस होना चाहिए | इसीलिए इस जीभ को रसना कहते हैं | जीभ का एक नाम हमारे यहाँ हिंदी में रसना  है क्योंकि ये रस पैदा करती है | इसके through स्वाद आएगा यानि जो related चीजें आपके पास हैं, वो डालिए कंप्यूटर में उस प्रोग्राम में जो उस से related है | मेरी बात समझ में आ रही है, हर चीज का प्रोग्राम, हर चीज की knowledge तो आपके पास  है, उसको reveal नहीं करना चाहते | तब हमको रस की अनुभूति होती है, भोजन के और रस या आनंद कैसी चीज है ? रस अनिर्वचनीय है, उसका वर्णन नहीं कर सकते | वचन में बद्ध नहीं कर सकते उसको, शब्दों में नहीं कह सकते उसको | आपको एक रसगुल्ला खिलाया जाए और आपसे पुछा जाए, कैसा है ? आप तुरंत उसका रस बताएँगे, मीठा है, माधुर्य रस बोलते हैं इसको | फिर आपको एक गुड़ की डेली खिलाई जाए, फिर आप से पुछा जाए, कैसा है ? आप कहेंगे मीठा है, माधुर्य रस है | फिर आप से पुछा जाए, दोनों में क्या अंतर है ? you can’t explain, you can’t say. क्योंकि जो महसूस किया उसको आप व्यक्त नहीं कर सकते | रस महसूस करने की चीज है, रस अनुभूति करने का विषय है | वचन का विषय नहीं है, निर्वचन है | इसका वर्णन  नहीं हो सकता | चाहे वो भोजन का रस हो, चाहे वो कविता का रस हो और चाहे वो ब्रह्म का रस हो | मेरी बात को समझ रहे हैं, नहीं समझ रहे हैं | रस explain नहीं हो सकता, अनिर्वचनीय है | रस अनुभूति का विषय है, भीतर ही भीतर महसूस किया जाता है और “संयोगादी रस निष्पत्ति” | भरत मुनि हमारे यहाँ कहता है | रस की निष्पत्ति कब होगी, जब संयोग होगा |  दो चीज मिलेंगी |

अब कविता के रस पर आते हैं | काव्य का रस भी, ये आपका सिनेमा जो है, ये भी काव्य है, काव्य के अंतर्गत आता है क्योंकि काव्य दो तरह का होता है, दृश्य काव्य और श्रव्य काव्य | एक वो काव्य होता है जो देखा जाता है आँख से, नाटक, सिनेमा, ये सब दृश्य काव्य हैं और एक श्रव्य काव्य होता है जो सुना जाता है कान से | काव्य दो तरह का होता है | लेकिन सिनेमा से उदाहरण अच्छा मिल जाएगा क्योंकि सिनेमा में दोनों इन्द्रियां काम करती हैं हमारी, कान भी और आँख भी और जो श्रव्य काव्य है उसमें केवल सुनने वाली इन्द्री काम करती है, आँख काम नहीं करती है | तो ये ज्यादा knowledge gain करता है, दृश्य काव्य | तो सिनेमा का उदाहरण देते हैं, आपने हिंदी फ़िल्में देखी होंगी कहीं | 35 रूपए खर्च करते हैं, ३ घंटा खर्च करते हैं उस मूवी को देखने में | 35 रूपए खर्च किये, ३ घंटे खराब किये और फिर मूवी में हीरो के साथ बैठ कर रोये और फिर बाहर आ कर कहते हैं, मूवी बड़ी अच्छी थी | फिर देखनी चाहिए, दूसरों से कहते हैं कि तुम भी देखो | what is truth ? रोये, पैसा भी ख़राब किया, वक्त भी ख़राब किया और कहते हैं बहुत अच्छी थी ! क्योंकि आनंद आया | आनंद कैसे फील होता है, जब beyond self जाते हैं | जब मूवी देख रहे होते हैं तो थोड़ी देर देखते देखते, देखते, देखते, हम गायब, हम तो होते ही नहीं |  रात है बाहर कि दिन है, पता ही नहीं है | मूवी में रात है तो रात है, मूवी में दिन है तो दिन है | हम हम नहीं रहते, हम थोड़ी देर के लिए हीरो बन जाते हैं | उसका दुःख हमारा दुःख बन जाता है, उसका सुख हमारा सुख बन जाता है | हमारा अपना कोई सुख दुःख नहीं होता | हम beyond self चले जाते हैं, यही आध्यात्म है | अधि माने beyond, अधि, prefix है और आत्म माने self. Beyond self, अपने आप से, अपने self से अलग चले जाते हैं | अपना होश नहीं रहता वहां हमको | हम अपने को अनुभव कब करते हैं | मूवी में तो हम हैं ही नहीं, हम beyond हो गए, हम तो हीरो हो गए हैं | उसका सुख हमारा सुख है, उसका दुःख हमारा दुःख है, हम उसके साथ मिल कर रो रहे हैं | जैसे ही हमको ख़याल आता है कि बगल में फलाना बैठा है तुरंत हमें ख्याल आता है कि हम है, क्योंकि ये comparative feeling होती है | Feeling of self-existence comparative है, जब तक दुसरे को नहीं देखेंगे कि हम हैं, ये फील नहीं होगा | जैसे ही हमको पता लगता है कि बगल में कोई बैठा है, तुरंत हमें ख्याल आता है कि हम हैं | आँख से आंसू एक दम बंद हो जाते हैं | रूमाल से आखें ऐसे साफ़ की जाती हैं कि बगल वाले को ये न पता चले कि मैं रो रहा था, वो ये समझे कि आँख में कुछ गिर गया था |  मेरी बात को समझ रहे हैं कि नहीं समझ रहे हैं, तुरंत रोना बंद हो जाता है | उसी समय आनंद ख़तम हो जाता है, जैसे ही हम लौट कर आते हैं | यानी आनंद आया डूबने पर | सुख जिसे आप कहते हैं, वैसे तो सुख कहीं है ही नहीं, आनंद ही आनंद है सब  जगह | लेकिन जिसे आप दुःख कह रहे हैं, उसमें भी आनंद आता है | कोई pinching बात कह देता है, रात भर बैठे बैठे सोच रहे हैं, नींद नहीं आ रही है, कई कई दिनों तक सोचते रहते हैं, कई कई रात नहीं सोते, भूख नहीं लग रही है | सोच सोच कर दुखी हो रहे हैं, उस बात को | उस वक्त अगर कोई दोस्त आकर के कहे कि चलो movie देखने चलते हैं, बहुत अच्छी लगी है, 3D है या वहां lecture हो रहा है, आओ चलें, सुन आयें | आप उस से कहते हैं, तू चला जा, अपना दिमाग ठीक नहीं है | क्यों नहीं जा रहे ? अगर चले जायेंगे, तो mind divert हो जायेगा, mind divert हो जायेगा तो सोचना बंद हो जायेगा, सोचना बंद होते ही दुखी होना बंद हो जायेगा और दुखी होने में इतना आनंद आ रहा है, छोड़ कर नहीं जा रहे हैं |

क्या ऐसा हुआ है कि सुख के मारे, किसी ने कोई pleasing बात कर दी हो, उसको सोच कर क्या कभी इतने खुश हुए हैं कि रात भर नींद न  आई हो ? सुख में आनन्द लेना जानते ही नहीं हैं | आनन्द तो दुःख में ले रहे हैं, रात भर उसी को सोच रहे हैं बैठ कर के | कभी कोई pleasing बात जिंदगी में हुई हो, उसे कभी बैठ करके २ घंटे, २ घंटे तो क्या २ मिनट भी नहीं सोचते | तब तो सोचते हैं, this is our right and it was his duty. ख़तम | बच्चों ने कोई pleasing बात कर दी, तो उनकी duty थी, हमारा right था | ख़तम | लेकिन अगर कोई pinching बात कह दी तो दस दिन तक सोच सोच कर दुखी हो रहे हैं, depression में मरे जा रहे हैं कि बच्चे ऐसे निकल गए, बताओ | क्यों हमारे बच्चे ऐसे निकल गए औरों के तो नहीं निकलते हैं | दुनिया में इतने बच्चे हैं, जाने हमारे बच्चे ही ऐसे क्यों हैं ? जाने हमारे भाग्य में क्या लिखा है ? जाने क्या क्या सोच रहे हैं और दुखी हो रहे हैं ! दुखी होने में मजा आ रहा है | नानक दुखिया सब संसार | ये पूरा संसार आनन्द ले रहा है दुःख में | सुख में आनन्द नहीं लेना चाह रहा है | Reality ये है कि न कहीं सुख है और न कहीं दुःख है, एक ही चीज है आनन्द | हमको सीधे वहीँ जाना चाहिए | अब ब्रह्मानन्द की बात करते हैं, ये छोटा भाई है, काव्य का जो आनंद है, ये छोटा भाई है ब्रह्मानन्द का | ये जो ब्रह्मानन्द है, उसमें भी beyond self जाना पड़ता है | इसलिए कबीर ने कहा है, “जब मैं था तब हरी नहीं और अब हरी है मैं नाही”

 To Be Continued…….

April 19, 2018

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