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नोचे तपतो रेंत

नोचे तपतो रेंत और ऊपर सूरज की आग।

जलती हुई हवाए डेसती जेसे काले नाग ॥

हुई हवाए

ऐसे में चलो कहीं छाँव तो मिली |

रुक कर सुस्ताने को ठाँव तो मिली ॥

टूर-दूर तक बियावान, झुलसे पौधे-सो देह।

जीवन के प्रति एक विवश-सा भाव और सन्देह |

जलते तलवे, उखड़ीं साँसें, छोटे-बड़े कदम ॥

आँखें फाड़े, बदहवास, मुंह खोल भटकते हम ।।

ऐसे में कुछ ठण्डक पाव को मिले

अपनी भी खबर चलो गांव  को मिले

June 25, 2022

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